मेरा परिचय

मूल अंग्रेज़ी लेख से अनुवादित।

प्रसाद भंडारकर ने आठ वर्ष की उम्र में हिंदुस्तानी संगीत सीखना शुरू किया। उनकी माँ ने उन्हें शास्त्रीय संगीत से परिचित कराया। प्रारंभिक शिक्षा हारमोनियम और हिंदुस्तानी गायन में हुई।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान प्रसाद कोई ऐसा वाद्य सीखना चाहते थे जिसका एकल वादन किया जा सके। तभी मुंबई के गुणीदास सम्मेलन में उन्हें पद्मविभूषण पंडित हरिप्रसाद चौरसिया का कार्यक्रम सुनने का अवसर मिला। बाँसुरी की सादगी और हरिजी की वादन-शैली ने उन्हें बहुत आकर्षित किया। जल्द ही उन्होंने मुंबई के श्री अनंतराव पटवर्धन से बाँसुरी सीखना शुरू किया। 1988 में उन्हें पंडित हरिप्रसाद चौरसिया का शिष्य बनने का सौभाग्य मिला। प्रसाद के वादन पर पंडित चौरसिया की भावपूर्ण और आत्मीय शैली का गहरा प्रभाव है।

हाल के वर्षों में प्रसाद मैहर घराने के प्रसिद्ध सितारवादक पंडित पार्थ चटर्जी से संगीत सीख रहे हैं। वे स्वर्गीय पंडित निखिल बनर्जी के प्रमुख शिष्यों में हैं। पार्थदा अपने संगीत में गायकी और तंत्रकारी—तारवाद्यों की शैली—का सुंदर मेल करते हैं। प्रसाद को यह दृष्टिकोण बहुत आकर्षक लगता है और वे इसे बाँसुरी पर भी अपनाने योग्य पाते हैं।

मन से संगीतकार, पेशे से इंजीनियर और प्रबंधन में स्नातकोत्तर प्रसाद अब कैलिफ़ोर्निया के सैन फ़्रांसिस्को में रहते हैं। वे बाँसुरी के एकल शास्त्रीय कार्यक्रमों और सुगम संगीत के कार्यक्रमों में संगत, दोनों करते हैं। वे सैन फ़्रांसिस्को बे एरिया में बाँसुरी सिखाते भी हैं। उनकी वेबसाइट बांसुरीफ्लूट डॉट कॉम दुनियाभर के विद्यार्थियों के लिए बाँसुरी सीखने का व्यापक मंच प्रदान करती है।