मेरा पसंदीदा संगीत
मूल अंग्रेज़ी लेख से अनुवादित।
अच्छा संगीत सुनना आधा सीखना है
मुंबई में बड़े होते हुए मुझे बहुत अच्छा संगीत सुनने का सौभाग्य मिला। हर सुबह आकाशवाणी के सुंदर भक्ति-संगीत से मेरी नींद खुलती थी। मैं उस समय बड़ा हुआ जब लता मंगेशकर, आशा भोसले और मोहम्मद रफ़ी जैसे दिग्गज फ़िल्म संगीत के शिखर पर थे। अपने थोड़े-से जेबखर्च से बचत करके मैंने मुंबई के रिदम हाउस से कैसेट का संग्रह बनाया। पढ़ाई में कुछ अच्छी उपलब्धियों के बाद मैंने माता-पिता को टर्नटेबल वाला बढ़िया स्टीरियो सिस्टम उपहार में देने के लिए राज़ी भी कर लिया।
मुझे पंडित भीमसेन जोशी, पंडित जसराज, पंडिता किशोरी आमोनकर, पंडित राजन और साजन मिश्र, पंडित रविशंकर तथा पंडित शिवकुमार शर्मा जैसे महान कलाकारों को प्रत्यक्ष सुनने के अवसर मिले। फिर स्वयं पंडित हरिप्रसाद चौरसिया से सीखने और उनके अनेक कार्यक्रम देखने का अवसर भी मिला।
मेरा दृढ़ विश्वास है कि इस महान संगीत को सुनने का मेरे जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ा है—चेतन और अवचेतन, दोनों स्तरों पर। मैं आपको जहाँ संभव हो, प्रत्यक्ष संगीत कार्यक्रमों में जाने और जितना हो सके ध्वनिमुद्रित संगीत सुनने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ। भले ही आप केवल एक विधा, जैसे बाँसुरी, सीखना चाहते हों, अधिक से अधिक विधाएँ सुनिए। इससे संगीत के बारे में आपकी समझ अधिक परिपक्व होगी।
पंडित भीमसेन जोशी ने एक साक्षात्कार में कहा था—“अच्छा विद्यार्थी चोर की तरह होता है। जहाँ से, जिससे संभव हो, अच्छे विचार चुरा लेता है।” यह बात पिछले 25 वर्षों से मेरे साथ है। आशा है, नीचे दिए संगीत से आप भी अच्छे विचार और प्रेरणाएँ चुराएँगे। अपने पसंदीदा संगीत के बारे में टिप्पणियों में भी लिखिए, ताकि हम सब उसका लाभ ले सकें।