नए साल के संकल्प और वह मुस्कान :)
मूल अंग्रेज़ी लेख से अनुवादित।
· प्रसाद भंडारकर
अगर आप मेरे जैसे हैं, तो शायद आपने नए साल का कोई संकल्प किया होगा। बल्कि तीन-चार किए होंगे।
और दूसरों को बताते समय आपके चेहरे पर एक मुस्कान होगी—ऐसी मुस्कान जिससे सामने वाला समझ जाए कि आप इन संकल्पों की बातें तो कर रहे हैं, लेकिन भीतर से विश्वास नहीं है कि पहले दो-चार दिनों के बाद भी इन पर टिके रहेंगे।
ऐसा क्यों होता है?
हाल ही में पढ़ी दो पुस्तकें इस प्रश्न के उत्तर की ओर संकेत करती हैं। और वह उत्तर संगीत के विद्यार्थियों के लिए उतना ही उपयोगी है, जितना अपने जीवन में किसी भी प्रकार का परिवर्तन चाहने वाले व्यक्ति के लिए।


पहली पुस्तक का नाम उपयुक्त ही है—स्विच — हाउ टू चेंज थिंग्स व्हेन चेंज इज़ हार्ड, यानी बदलाव कठिन हो तो उसे कैसे लाएँ। इसकी कुछ अवधारणाएँ और सिद्धांत एक और पुस्तक से लिए गए हैं, जो मैंने हाल में पढ़ी—हैप्पिनेस हाइपॉथेसिस।
दोनों पुस्तकें मानव व्यवहार का एक सरल, लेकिन प्रभावशाली मॉडल बताती हैं। उसका सार इस तरह है:
मानव मस्तिष्क के विकास के कारण हम सभी के व्यक्तित्व के दो पहलू हैं।
हमारे मस्तिष्क का पुराना भाग जीवित रहने की “लड़ो या भागो” वाली सहज प्रवृत्तियों के लिए आनुवंशिक रूप से तैयार है। यह बात हममें और अन्य पशुओं में समान है। ऐसे निर्णय पर देर तक विचार नहीं किया जा सकता। कल्पना कीजिए, बाघ हमला कर रहा हो और कोई व्यक्ति लड़ने या भागने के लाभ-हानि तौल रहा हो! इसलिए मस्तिष्क का यह भाग पूरी जानकारी पर आधारित निर्णय के बजाय आवेगपूर्ण, तुरंत निर्णय लेने के लिए बना है।
फिर नया मस्तिष्क, यानी नियोकोर्टेक्स है। ये हमारे मस्तिष्क के सामने के हिस्से हैं, जो अधिकतर पशुओं में नहीं होते। दूसरे शब्दों में, यह मनुष्य की विशिष्ट पहचान है। समय के साथ यह हिस्सा सोचने और तर्क तथा जानकारी के आधार पर निर्णय लेने के लिए विकसित हुआ है।
पुस्तकें मन के इन दो पहलुओं की तुलना हाथी और उसके सवार से करती हैं। हाथी आवेगपूर्ण मन है और सवार तर्कशील मन। सवार सोच-समझकर निर्णय लेता है और हाथी को दिशा देने की कोशिश करता है।
सवार स्वभावतः लंबे समय के बारे में सोचता है। वह कहता है, “प्रसाद, नए साल में थोड़ा वज़न कम करोगे, तो स्वास्थ्य अच्छा होगा—और शायद दिखोगे भी बेहतर।”
लेकिन हाथी के अपने विचार हैं। पहले कुछ दिन वह सवार की बात मानता है। फिर किसी शाम उसका व्यायाम के बजाय टेलीविज़न देखने का “मन” होता है। या पूरी चॉकलेट खा जाने का “मन” होता है।
सवार का हाथी पर नियंत्रण छूट जाता है और दोनों रास्ते से भटक जाते हैं। याद रखिए, हाथी सवार से बहुत बड़ा है।
इसके अलावा, हाथी और सवार दोनों को पिछली बातें याद हैं। वे जानते हैं कि पिछले साल और उससे पहले भी ऐसा ही हुआ था। वही मुस्कान का कारण है। सवार जानता है कि आपका संकल्प अच्छा और तर्कसंगत है, लेकिन दोनों को पता है कि आप—यानी वे—दो दिन बाद उसे छोड़ देंगे।
तो क्या नए साल के संकल्प व्यर्थ हैं? ऐसा नहीं है। स्विच पुस्तक एक ढाँचा देती है, जिससे आप सवार, हाथी और जिस रास्ते पर वे चल रहे हैं, तीनों पर काम कर सकते हैं।
अगर मैं नए साल में थोड़ा वज़न घटाने का संकल्प करूँ, तो इस तरह आगे बढ़ूँगा:
सवार को दिशा देना
- सफल उदाहरण खोजूँगा। पिछले साल योजना पूरी तरह न निभाने पर भी २० के बजाय १० पाउंड तो घटे थे। उसमें क्या काम आया?
- महत्त्वपूर्ण कदम स्पष्ट करूँगा। ट्रेडमिल पर दौड़ना नहीं चला, लेकिन टेनिस खेलना काम आया।
हाथी को प्रेरित करना
- भावना खोजूँगा। टेनिस की गेंद पर ज़ोर से प्रहार करना कितना आनंद देता है! केवल वज़न घटाने के लिए खेलने के बजाय उस आनंद पर ध्यान दूँगा।
- बदलाव छोटा करूँगा। रोज़ सुबह छह बजे ९० मिनट खेलने के बजाय १५ मिनट खेलूँगा।
रास्ता तैयार करना
- परिवेश बदलूँगा। टेनिस का रैकेट और जूते कार में रखूँगा, ताकि जब मन हो, खेल सकूँ।
- आदतें बनाऊँगा। कहा जाता है कि कोई काम नियमित रूप से २१ दिन करने पर आदत बन जाती है।
यह सब संगीत के रियाज़ पर भी कितना लागू होता है! कितनी बार हम कहते हैं कि सुबह जल्दी उठकर देर तक अभ्यास करेंगे, फिर सुबह सोते रह जाते हैं और सारा दिन अपराधबोध होता है। सोचिए, नियमित रियाज़ के लिए इस मॉडल को कैसे अपनाया जा सकता है।