Bansuri performance with tabla and accompanying musicians

हमारे आदर्श

मूल अंग्रेज़ी लेख से अनुवादित।

2010-11-20 · प्रसाद भंडारकर

आज कक्षा में हम राग अहीर भैरव का अभ्यास कर रहे थे। इस समूह के विद्यार्थियों की कठिनाई यह है कि वे राग और उसमें विस्तार तो अच्छी तरह कर लेते हैं, लेकिन संगीत को अधिक समृद्ध बनाने वाले अलंकार भूल जाते हैं। आज हमने इन्हीं पर काम करने का निश्चय किया। इसका सबसे अच्छा तरीका है किसी परिचित धुन को ठीक वैसे बजाना, जैसे वह मूल रूप में गाई या बजाई गई है।

अहीर भैरव का अभ्यास चल रहा था, इसलिए हमने पंडित भीमसेन जोशी और लता मंगेशकर का सुंदर भजन चुना—राम का गुणगान करिए। अर्थात, भगवान राम के गुणों की प्रशंसा गाइए।

इस रचना का मेरे मन में विशेष स्थान है। मुझे याद है, अगस्त 1988 का एक शनिवार था। मैं पहली बार हरिजी के घर गया और उनसे बाँसुरी सिखाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वे शुरुआती विद्यार्थियों को नहीं सिखाते, और मुझे कुछ बजाने को कहा। मैंने यही भजन बजाया था।

आज कक्षा में यह भजन बजाते हुए मुझे लगा कि लता मंगेशकर और भीमसेन जोशी का मेरे और हममें से अधिकतर लोगों के जीवन में कितना बड़ा स्थान है। कल्पना कीजिए, ऐसा संसार जिसमें लता मंगेशकर न हों। या भीमसेन जोशी न हों। सोचिए, अगर हम इन महान कलाकारों के समय में पैदा ही न हुए होते।

फिर उन सारी धुनों के बारे में सोचिए, जो हमें मिली ही न होतीं। या शायद उन्हें किसी और ने गाया होता, जिसके पास ईश्वर से मिली शुद्ध सुरों की वह शक्ति न होती।

वह संसार कैसा होता?

कल्पना कीजिए, अगर पंडित हरिप्रसाद चौरसिया किसी दूसरे युग में जन्मे होते। तब क्या होता…

कम से कम मुझे बाँसुरी सीखने की वह प्रेरणा नहीं मिलती, जिसने आज मेरा जीवन इतना समृद्ध किया है। मेरा जीवन अधूरा होता और मुझे इसका पता भी नहीं चलता। वह चीज़ ही न होती, जिसने बुरे समय में मुझे सँभाला और अच्छे समय का आनंद बढ़ाया।

शायद दूसरे बाँसुरी वादक बाँसुरी की अपनी खूबियों और भावपूर्ण प्रकृति का लाभ उठाने के बजाय अन्य संगीतकारों की नकल कर रहे होते। हमें बहुत-सा यांत्रिक संगीत सुनने को मिलता।

लताजी, भीमसेनजी, हरिजी या ज़ाकिर हुसैन जैसे आदर्श रोज़ पैदा नहीं होते। लेकिन जब होते हैं, तो अपने क्षेत्र को ऐसी ऊँचाइयों पर ले जाते हैं कि पीढ़ियाँ उन तक पहुँचने की कोशिश करने को प्रेरित होती हैं। हमारा जीवन केवल उनके संगीत से ही नहीं, उनसे प्रेरित सभी लोगों के संगीत से भी समृद्ध होता है।

हम सबके पास—चाहे हम संगीतकार हों या न हों—इन आदर्शों के प्रति कृतज्ञ होने के अनेक कारण हैं।